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May 11, 2019
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मुंबई की ख़ास पहचान गणेश भगवान् :- श्री सिद्धिविनायक मंदिर

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मुंबई की ख़ास पहचान गणेश भगवान् :- श्री सिद्धिविनायक मंदिर

गणेश जी के बारे में तो हर कोई जानता है, की वो महादेव और आदिशक्ति के प्रथम पूजनीय देव पुत्र है,
मुंबई में इनका एक प्रसिद्द मंदिर है, श्री सिद्धिविनायक मंदिर ( कहा जाता है की गणेश जी की सूंड दाईं ओर वाली मुड़ी हुई मूर्ती सिद्धपीठ कहलाती है जिसमे से एक श्री सिद्धिविनायक मंदिर भी है, ग्रंथो में कहा गया है की दाईं ओर वाली सूंड की मूर्ति जितनी जल्दी प्रसन्न होते है उतनी जल्दी ही कुपित भी हो जाते है |

सिद्धिविनायक मंदिर
वैसे तो गणेश जी के भक्त पूरी दुनिया में है लेकिन महाराष्ट्र में इनके भक्तो की संख्या सबसे अधिक है, मुंबई के प्रभा देवी इलाके का श्री सिद्धिविनायक मंदिर विश्व में प्रसिद्द है, क्योकि यहाँ पर सिर्फ हिन्दू ही नहीं बल्कि हर धर्म के लोग इनकी पूजा – अर्चना करने आते है, कहा जाता है की इस मंदिर की तुलना न ही ‘सिद्ध टेक’ और नहीं ‘ अष्टविनायकों ‘ में नहीं की जाती है इस मंदिर की महान्यता अपने आप में ही अतुलनीय है जो भक्तो को अपनी ओर आकर्षित करती है यहाँ तक की महाराष्ट्र के अहमद नगर जिले में गणेश ग का एक सिद्ध टेक का नाम ही सिद्धिविनायक रखा गया है, और इस टेक की गिनती अष्टविनायकों में करी जाती है, महाराष्ट्र में गणेश जी के आठ सिद्ध ऐतिहासिक स्थल है जिन्हे अष्टविनायक के नाम से जाता हैं, लेकिन श्री सिद्धिविनायक मंदिर इन अष्टविनायकों से अलग है और इसकी मान्यता भी अलग है क्योकि ये मंदिर भी सिद्धपीठ ही है, इसकी बाई तरफ मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा अपने आप में ही एक सिद्धपीठ होता है,

इतिहास
कहा जाता है की इस मंदिर का निर्माण 1612 ईस्वी में हुआ था लेकिन सरकारी दस्तावेजों में 19 नवंबर 1801 में दर्ज किया हुआ है यह मंदिर पहले बहुत ही छोटा था, दो दशकों पहले इस मंदिर का अन्य बार पुनः निर्माण किया गया था, 1991 में महाराष्ट्र सरकार ने श्री सिद्धिविनायक मंदिर का भव्य निर्माण किया जो निर्माण 20 हजार वर्ग फिट ज़मीन पर किया | अब यह मंदिर पांच मंजिल की ईमारत का बना हुआ है, इसकी दूसरी मंजिल पर अस्पताल भी बना हुआ है जहाँ पर रोगियों का इलाज मंदिर की कमेटी वाले मुफ्त में करते है और इसी मंजिल पर एक बड़ा सा रसोई घर भी बना हुआ है यहाँ से एक सीधी लिफ्ट जाती है जिसमे पुजारी प्रसाद व लड्डू ले जाकर गणेश जी की मूर्ति को भोग लगाया जाता है,

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