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Jun 1, 2019
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यूरोप का रहस्य्मयी ख़ास मसाला :- दालचीनी

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यूरोप का रहस्य्मयी ख़ास मसाला :- दालचीनी

कहा जाता है की अरब सौदागर दालचीनी मसाले को लेकर यूरोप में इसका आदान – प्रदान करने के उद्देश्य से गए थे पर इस रहस्यमयी औषधि को जानकर उस ज़माने में दालचीनी अगर रहीसो का वैभव था तो कुछ लड़ाइयों का भी गवाह बना, इस चमत्कारी मसाले का जो एक ख़ास पेड़ की छाल से बनता है इसका तेल और पाउडर ख़ास कामो में काम आता है आज भी इसे औषधि के रुप में इस्तेमाल किया जाता है |
2000 साल पहले ये दालचीनी के पेड़ चीन में पाए जाते थे और वहा से मिस्त्र में इस्तेमाल किये जाते थे तब इसका लेख सुगंध के तौर पर किया जाता था, इसक उल्लेख आपको बाइबल में भी मिलेगा, इस तेल को विशेषकर ओल्ड टेस्टामेंट के रूप- में किया गया था, दालचीनी की प्राचीन काल में सबसे पहली पैदावार दक्षिण भारत और श्रीलंका में हुई थी, यही से अरब सौदागर भर – भर कर यूरोप लेकर जाते थे | कहा जाता है की रोमन सम्राट नीरो की दूसरी बीबी पोपाए 65 वर्ष की उम्र में उनका निधन के बाद उनके अंतिमसंस्कार में दालचीनी की चिता बनवाई थी |
दालचीनी रहीसो की निशानी है यूरोप में इसे स्टेटससिम्बल के नाम से बी ही जाना जाता है, कहा जाता है अरब सागर से यूरोप जाने तक के रास्ते में दूरी होने के कारन अरबी लोग इसे एक सीमित मात्रा में लेकर जा सकते है, इसीके चलते ये यूरोप में बहुत महँगी बिकती थी, इसके चलते ये स्टेटस सिम्बल भी बनी रही, जब कोई मिड्ल क्लास आदमी अपने काम या नौकरी में तरक्की करता था और दावत के दिन दालचीनी का ख़ास इस्तेमाल करके अपने स्टेटस को बढ़ाता था, यूरोप में शर्दियाँ के महीने में मांसाहारी भोजन में इसका ख़ास तौर इस्तेमाल किया जाता है,

आज के दौर में दालचीनी दो प्रकार की होगई है, एक वो जो प्राचीन काल में दक्षिण भारत और श्रीलंका से आती है और अब इंडोनेशिया में भी इसे उगाया जाता है, जिसका नाम शेषिया है , श्री लंका की दालचीनी एक विशेष महत्वता है जिसे लोग आज भी चॉकलेट की तरह और ड्रिंक में डालकर पीते है और कहा जाता है की ये दालचीनी ज्यादा मीठी होती है

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Food
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