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Jun 4, 2019
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लद्दाक का इतिहास

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लद्दाक का इतिहास

कहा जाता है की ये क्षेत्र निओलिथिक समय से बसा हुआ है और उसके शुरुआती दौर में इंडो – आयरन आबादी शामिल थी,इंडो आयरन भाषा जिसे इंडिक भाषा के नाम से भी जाना जाता है, यूरोप और ईरान इन दोनों शाखाओ के उपसमूह को इंडो आयरन भाषा कहा जाता है, और आज के दौर में 21वी शताब्दी में इंडिया 911 मिलियन, पाकिस्तान में 200 मिलियन, बांग्लादेश में 150 मिलियन, नेपाल में 26 मिलियन, श्रीलंका में 15 मिलियन, म्यांमार में एक मिलियन अधिकतर लोगो द्वारा बोली जाती है

कहा जाता है की दूसरी शताब्दी में बौद्ध धर्म, कश्मीर से पश्चिम लद्दाख तक फ़ैल गया था, लेकिन आठवीं शताब्दी में लद्दाख को तिब्बत साम्राज्य ने अपने आधीन कर लिया था, लद्दाख ने तिब्बत और चीन इन दोनों राज्यों के बीच में परिवर्तन किया, तिब्बती साम्राज्य टूटने के बाद लद्दाखी वंश की स्थापना करी गई, और कहा जाता है की इस समय राजवंश ने बौद्ध धर्म का नेतृत्व किया, जब तिब्बत का साम्राज्य टूट गया था,13वी शताब्दी के दौरान दक्षिण एशिया इस्लामी विजय के साथ लद्दाख और तिब्बत दोनों ने धार्मिक मामलो पर मार्गदर्शन ऐना स्वीकार करलिया था, लेकिन आखिर में डोगरा किंग ने लद्दाख पर अपना राज्य स्थापित कर लिया |

1850 दशक के दौरान लद्दाख में यूरोपियन लोगो का आना शुरू होगया, साथ ही साथ उन्होंने अपनी संख्या को भी बढ़ाया, लेकिन ब्रिटिश साम्राज्य के दौरान लद्दाख केवल और केवल डोगरा किंग की संपत्ति थी |

भारत के आज़ाद होने के समय डोगरा किंग का साशक महाराजा हरिसिंह को सौप दिया था, लेकिन इस घटना को देखते हुए पाकिस्तान के हमलावरों ने हरिसिंह को हानि पहुंचाने का प्रयत्न किया था लेकिन उन्हें खदेड़ दिया था 1949 में चीन ने अपने पुराने व्यापार के मार्गो को बंद करवा दिया था और 1955 के दौरान तिब्बत और झिंजियांग को जोड़ने वाली यातायात साधनो की सड़क का निर्माण किया गया, और इसी के दौरान चीन में पाकिस्तान के साथ सयुक्त रूप से राजमार्ग का निर्माण किया था जिसका नाम कराकोरम राजमार्ग का निर्माण किया था

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